
केंद्रापडा 29 जुलाई: मानव-मगरमच्छ के संघर्ष मे और एक जान चली गई। स्थानीय लोगों की कहनेका का अनुसार, कुलसाही गांव के बाबा अमूल्य दास गुरुवार की रात प्रकृति की पुकार का जवाब देने के लिए पास की ब्राह्मणी नदी के तटबंध पर गए थे, तभी एक मगरमच्छ ने उन्हें नदी में खींच लिया। घटना की सूचना मिलने पर वन और अग्निशमन कर्मीने खोज और बचाव अभियान चलाया, लेकिन अमूल्या के शव का पता लगाने में असफल रहे। शुक्रवार को वन कर्मचारी , अग्निशमन बाहिनी की मदद से खोज और बचाव अभियान चलाया। हालांकि, 17 घंटे बाद स्थानीय लोगों की नजर अमूल्य के कटे हुए सिर पर पड़ी जो नदी के पानी पर तैर रहा था। स्थानीय मजिस्ट्रेट और स्थानीय आईआईसी की उपस्थिति में क्षत-विक्षत शव को बरामद किया गया। पट्टामुंन्डाइ पुलिस ने बाद में शव को जब्त कर के परीक्षण के लिए भेज दिया। वन बिभाग ने मगरमच्छ के हमले में अमूल्य की मौत की पुष्टि की है ।
तटीय जिले के पट्टामुंन्द्दाई, केंन्द्रापाड़ा, राजनगर, आली,राजकनिका और महाकालपारा ब्लॉकों में मानव-मगरमछकी संघर्ष नियमित अंतराल पर चल रहा है। पिछले डेढ़ महीने में मगरमच्छ के हमलों में 4 लोगोकि मोत हुयाहे । एक नाबालिग लड़के और एक महिला, एक ब्रुधके समेत चार लोगों की जान जा चुकी है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि वन बिभाग करमी ने नदी किनारे के ग्रामीणों की जान और संपत्ति को बचाने के लिए ठोस इंटेजम नेहीं की हे । तभी मगरमच्छ एक का बाद एक जान ले चलता । जिले की ज्यादातर मगरमच्छ प्रभावित नदियों में लोहे की बाड़ लगाने की उनकी मांगों को नजरअंदाज कर दिते है। राजनगर डीएफओ गोपीनाथ सुदर्शन यादव से संपर्क करने पर कहा कि वन विभाग ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे मगरमच्छों से भरे जल निकायों में प्रवेश करके अपनी जान जोखिम में न डालें। उन्होंने कहा कि जल्द ही उन स्नान पर लोहे की बाड़ लगाई जाएगी,











